श्रीमद्भागवत महापुराण
Srimad Bhagavatam
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श्रीमद्भागवत महापुराण (Shrimad Bhagavatam) — परिचय
महापुराण • महर्षि वेदव्यास / श्री शुकदेव जी • १२ स्कंध • १८,००० श्लोक
भगवान श्री कृष्ण के दिव्य अवतार, रासलीला, प्रह्लाद, ध्रुव और राजा परीक्षित के उद्धार की परम पावन भागवत कथा।
श्रीमद्भागवत महापुराण को निगम कल्पतरु का पका हुआ फल कहा गया है। यह भक्ति रस का अमृत सरोवर है। राजा परीक्षित को तक्षक दंश से पूर्व शुकदेव जी द्वारा सात दिनों में सुनाई गई यह अमर कथा जीव को अभय पद प्रदान करती है।
प्रथम स्कंध, द्वितीय अध्याय - भक्ति योग
स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे । अहैतुकी प्रतिहता ययात्मा सम्प्रसीदति ॥
मनुष्यों के लिए वही सर्वश्रेष्ठ परम धर्म है जिससे इंद्रियातीत परमात्मा श्री कृष्ण में अहैतुकी (निःस्वार्थ) और निष्काम भक्ति उत्पन्न हो, जिससे आत्मा परम प्रसन्न होती है।
The supreme occupation for all humanity is that by which men can attain to loving devotional service unto the transcendent Lord. Such devotional service must be unmotivated and uninterrupted to completely satisfy the self.