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माण्डूक्योपनिषद्

Mandukya Upanishad

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माण्डूक्योपनिषद् (Mandukya Upanishad) — परिचय

उपनिषद • अथर्ववेद • १२ मंत्र

ॐकार के तीन पादों और तुरीय अवस्था का विश्लेषण करने वाली अत्यंत गहन वेदान्त उपनिषद।

माण्डूक्योपनिषद् अथर्ववेद की लघु किंतु सर्वाधिक प्रभावशाली उपनिषद है। यह चेतना की चार अवस्थाओं—जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय—का प्रत्यक्ष विश्लेषण करती है।

प्रथम मंत्र - ॐकार की व्याख्या

ॐ इत्येतदक्षरमिदꣳ सर्वं तस्योपव्याख्यानं भूतं भवद् भविष्यदिति सर्वमोङ्कार एव । यच्चान्यत् त्रिकालातीतं तदप्योङ्कार एव ॥

ॐ—यह अविनाशी अक्षर ही यह सब कुछ है। जो बीत चुका है, जो वर्तमान है और जो भविष्य में होगा, वह सब ॐकार ही है।

OM—this imperishable syllable is all this. What was, what is, and what shall be, all is verily OM.