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ऋग्वेद संहिता

Rigveda Samhita

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ऋग्वेद संहिता (Rigveda Samhita) — परिचय

वेद संहिता • अनादि / अपौरुषेय (ब्रह्म ऋषि) • १० मण्डल • १०२८ सूक्त

संसार का प्राचीनतम ज्ञानकोश जिसमें प्रकृति, देवता, सृष्टि उत्पत्ति और परम सत्य का गायन है।

ऋग्वेद सनातन धर्म का मूल स्तम्भ है। गायत्री महामंत्र, नासदीय सूक्त (सृष्टि उत्पत्ति), पुरुष सूक्त और महामृत्युंजय मंत्र जैसे सर्वोच्च आध्यात्मिक सूत्र इसी पावन संहिता से उद्भूत हुए हैं।

नासदीय सूक्त (मण्डल १०, सूक्त १२९)

नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमा परो यत् । किमावरीवः कुह कस्य शर्मन्नम्भः किमासीद्गहनं गभीरम् ॥

सृष्टि के पूर्व न असत था, न सत था। न अंतरिक्ष था, न उससे परे आकाश था। उस समय कौन किसको आच्छादित कर रहा था? कहाँ किसकी शरण में गहन गंभीर जल था?

Then was not non-existence nor existence; there was no realm of air, no sky beyond it. What covered in, and where? And what gave shelter? Was water there, unfathomed depth of water?