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महाभारत (Mahabharata) — परिचय

इतिहास एवं महाकाव्य • महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास • १८ पर्व • १,००,०००+ श्लोक

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का विश्वप्रसिद्ध महाग्रंथ जिसमें कौरव-पाण्डव वंश, कुरुक्षेत्र महायुद्ध और शाश्वत मानवीय मूल्यों का विस्तृत वर्णन है।

महाभारत महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित विश्व का सबसे विशाल और गहन महाकाव्य है। इसमें १८ पर्व (आदि, सभा, वन, विराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक, स्त्री, शांति, अनुशासन, अश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक और स्वर्गारोहण पर्व) तथा १ लाख से अधिक श्लोक सम्मिलित हैं। कहा गया है कि "यन्नेहास्ति न तत्क्वचित्" (जो इस महाभारत में नहीं है, वह कहीं नहीं है)। इसी महाग्रंथ के भीष्म पर्व में जगत्प्रसिद्ध श्रीमद्भगवद्गीता समाहित है।

मंगलाचरण एवं आदि पर्व

नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् । देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ॥

भगवान नारायण, नर-श्रेष्ठ अर्जुन, भगवती सरस्वती और महर्षि वेदव्यास को नमस्कार करके "जय" (महाभारत) नामक इतिहास का पाठ करना चाहिए।

Having bowed down to Lord Narayana, and to Nara the foremost of beings, and to Goddess Saraswati, and to Sage Vyasa, one should recite the sacred history named Jaya (Mahabharata).