नवरात्रि 2026 दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और शुभ रंग
शारदीय नवरात्रि 2026 का दूसरा दिन सोमवार, 12 अक्टूबर को है। इस दिन नवदुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है, जो तप, संयम और वैराग्य की देवी मानी जाती हैं। पहले दिन घटस्थापना के बाद अब भक्त व्रत, जप और साधना को आगे बढ़ाते हैं। नीचे दूसरे दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, पूजा विधि, मंत्र, भोग, कथा और शुभ रंग की पूरी जानकारी दी गई है।
नवरात्रि के दूसरे दिन का शुभ मुहूर्त
| अवसर | समय (नई दिल्ली) |
| अभिजित मुहूर्त | सुबह लगभग 11:29 से दोपहर 12:15 बजे तक |
| पूजा का उत्तम समय | सुबह स्नान के बाद, सूर्योदय से दोपहर तक |
| संध्या आरती | सूर्यास्त के बाद दीप जलाकर |
नोट: मुहूर्त का समय शहर के अनुसार थोड़ा बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग ज़रूर देखें।
कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी?
'ब्रह्म' का अर्थ तप है और 'चारिणी' का अर्थ आचरण करने वाली, यानी तपस्या में लीन रहने वाली देवी। इनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएँ हाथ में कमंडल रहता है। मान्यता है कि इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य और धैर्य की शक्ति बढ़ती है और विद्यार्थियों व साधकों को एकाग्रता मिलती है। परंपरा में इन्हें स्वाधिष्ठान चक्र से जोड़ा जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा सामग्री
- चौकी, लाल या पीला कपड़ा, माँ का चित्र या प्रतिमा
- रोली, अक्षत, चंदन, कलावा, धूप-दीप, घी का दीपक
- सफेद फूल, फल, तुलसी दल
- भोग के लिए शक्कर, मिश्री, पंचामृत और दूध की मिठाई
- जप के लिए रुद्राक्ष या तुलसी की माला
दूसरे दिन की पूजा विधि
- सुबह जल्दी स्नान करें, सफेद या हल्के रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- कलश और अखंड ज्योत की देखभाल करें, पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें।
- सबसे पहले गणेश जी का स्मरण कर कलश का पूजन करें।
- माँ ब्रह्मचारिणी को रोली, चंदन, अक्षत, सफेद फूल और धूप-दीप अर्पित करें।
- शक्कर, मिश्री या पंचामृत का भोग लगाएँ।
- माला से मंत्र जप करें और दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
- आरती के बाद प्रसाद बाँटें और परिवार में लंबी आयु की कामना करें।
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
सरल मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
ध्यान मंत्र: दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
स्तुति: या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां ब्रह्मचारिणी की कथा
पूर्व जन्म में देवी पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं। देवर्षि नारद के उपदेश से उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप का संकल्प लिया। कहा जाता है कि उन्होंने हज़ार वर्ष फल-फूल खाकर और फिर वर्षों तक केवल बेलपत्र खाकर तपस्या की, और आगे चलकर निराहार रहने लगीं। पत्तों तक का त्याग करने से वे 'अपर्णा' भी कहलाईं। उनके तप से तीनों लोक गूँज उठे और देवताओं व ऋषियों ने उनके संकल्प की सराहना की। अंततः शिवजी प्रसन्न हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी स्वीकार किया। यह कथा सिखाती है कि निरंतर धैर्य और दृढ़ निश्चय से कठिन लक्ष्य भी पाया जा सकता है।
नवरात्रि 2026 के नौ दिन और शुभ रंग
| तारीख | देवी | शुभ रंग |
| 11 अक्टूबर | माँ शैलपुत्री (घटस्थापना) | नारंगी |
| 12 अक्टूबर | माँ ब्रह्मचारिणी | सफेद |
| 13 अक्टूबर | माँ चंद्रघंटा | लाल |
| 14 अक्टूबर | माँ कूष्मांडा | नीला |
| 15 अक्टूबर | माँ स्कंदमाता | पीला |
| 16 अक्टूबर | माँ कात्यायनी | हरा |
| 17 अक्टूबर | माँ कालरात्रि | काला/गहरा रंग |
| 18-19 अक्टूबर | अष्टमी, महागौरी और सिद्धिदात्री | बैंगनी, मोरपंखी हरा |
विजयादशमी (दशहरा) 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को है।
नवरात्रि के दिनों में इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा स्थल और कलश की साफ-सफाई रखें, कलश की रोज़ पूजा करें।
- सात्विक भोजन करें और अपनी सेहत के अनुसार व्रत रखें।
- झूठ, क्रोध और वाद-विवाद से बचें, और स्त्रियों का सम्मान करें।
नवरात्रि की शुभकामनाएँ
"माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से आपके जीवन में धैर्य, ज्ञान और शांति बनी रहे। आपको और आपके परिवार को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।"
सामान्य प्रश्न (FAQ)
नवरात्रि के दूसरे दिन किसकी पूजा होती है?
मां ब्रह्मचारिणी की।
दूसरे दिन का शुभ रंग कौन-सा है?
सफेद रंग शुभ माना गया है।
माँ ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएँ?
शक्कर, मिश्री और पंचामृत।
नवरात्रि कब तक है?
11 से 19 अक्टूबर तक, और 20 अक्टूबर को दशहरा है।