नवरात्रि 2026 पहला दिन: मां शैलपुत्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग, कथा और आरती
शारदीय नवरात्रि 2026 का पहला दिन रविवार, 11 अक्टूबर को है, और आज नवदुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना होती है। इसी दिन घटस्थापना कर नौ दिनों के व्रत और पूजन का संकल्प लिया जाता है। इस लेख में पहले दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, चरण-दर-चरण पूजा विधि, मंत्र, प्रिय भोग, कथा और आरती की जानकारी एक साथ दी गई है।
नवरात्रि के पहले दिन का शुभ मुहूर्त
| अवसर | समय (नई दिल्ली) |
| घटस्थापना का मुख्य मुहूर्त | सुबह लगभग 6:32 से 10:26 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर लगभग 12:02 से 12:48 बजे तक |
| संध्या पूजन | शाम को सूर्यास्त के बाद दीप जलाकर आरती करें |
नोट: समय शहर के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग से मिलान कर लें।
कौन हैं मां शैलपुत्री?
'शैल' का अर्थ पर्वत है, इसलिए पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने से देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा। इनका वाहन वृषभ (नंदी) है, इसी कारण इन्हें वृषारूढ़ा भी कहते हैं। दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल का फूल धारण किए माँ का रूप शांत और तेजस्वी है। मान्यता है कि इनका संबंध मूलाधार चक्र से है और इनकी उपासना से साधना की नींव मज़बूत होती है। पहले दिन का शुभ रंग नारंगी माना गया है।
पूजा सामग्री
- कलश, मिट्टी का पात्र, साफ मिट्टी और जौ
- आम के पत्ते, चुनरी में लिपटा नारियल, कलावा
- रोली, सिंदूर, अक्षत, कपूर, धूप-अगरबत्ती
- सफेद फूल (चमेली विशेष प्रिय), फल, घी का दीपक
- भोग के लिए सफेद मिठाई, खीर या देसी घी
मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें, चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ की प्रतिमा या चित्र रखें।
- शुभ मुहूर्त में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में जौ बोकर कलश स्थापित करें।
- माँ को सिंदूर, अक्षत, सफेद फूल, धूप और दीप अर्पित करें।
- सफेद मिठाई या गाय के दूध की खीर का भोग लगाएँ।
- मंत्र जप करें, यथाशक्ति दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
- अंत में आरती कर क्षमा-प्रार्थना करें और प्रसाद बाँटें।
मां शैलपुत्री के मंत्र
बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः
ध्यान मंत्र: वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
स्तुति: या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
नवरात्रि के पहले दिन का भोग
मां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएँ प्रिय हैं। देसी घी, गाय के दूध की खीर, सफेद बर्फी, मावे के लड्डू या मखाने की खीर का भोग लगाया जा सकता है। मान्यता है कि घी का भोग अर्पित करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है।
मां शैलपुत्री की कथा
पूर्व जन्म में माँ प्रजापति दक्ष की पुत्री सती थीं और उन्होंने भगवान शिव से विवाह किया था। दक्ष ने एक विशाल यज्ञ रखा, पर शिवजी को निमंत्रण नहीं दिया। सती बिना बुलाए पिता के घर पहुँचीं, जहाँ शिव का अपमान होता देख उन्होंने योगाग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया। अगले जन्म में वे हिमालय के घर पुत्री बनकर जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं, और आगे चलकर पुनः शिव की अर्धांगिनी बनीं। यह कथा सिखाती है कि सम्मान और श्रद्धा के बिना किया गया आयोजन निष्फल रहता है।
माँ शैलपुत्री की आरती
पूजा का समापन आरती से करें। पारंपरिक 'शैलपुत्री माँ बैल असवार' आरती के साथ घी का दीपक घुमाएँ और परिवार सहित माँ से सुख, शांति और आरोग्य की प्रार्थना करें।
पूजा का फल
मान्यता है कि शैलपुत्री की उपासना से धन-धान्य, सौभाग्य और अच्छी सेहत मिलती है, तथा विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं। ज्योतिष में इन्हें चंद्रमा से जुड़ा माना जाता है।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
नवरात्रि के पहले दिन किसकी पूजा होती है?
मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की।
पहले दिन का शुभ रंग कौन-सा है?
नारंगी रंग शुभ माना जाता है।
शैलपुत्री को कौन-सा फूल प्रिय है?
सफेद फूल, विशेषकर चमेली।
अगले दिन किसकी पूजा होगी?
12 अक्टूबर को माँ ब्रह्मचारिणी की।